प्रेम प्रसंग कैसा होता है?
विवाह करने का उद्देश्य :- विवाह का उद्देश्य केवल संतानोत्पत्ति करना है।
फिर पति-पत्नी मिलकर परिश्रम करके बच्चों का पालन करते हैं। उनका विवाह
कर देते हैं। फिर वे अपना घर बसाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रेम विवाह समाज में
अशांति का बीज बोना है। समाज बिगाड़ की चिंगारी है
प्रेम प्रसंग कैसा होता है?
जो चरित्राहीन लड़के-लड़की होते हैं, वे चलते समय अजीबो-गरीब
ऐक्टिंग करते हैं। उन लजमारों की दृष्टि भी टेढ़ी-मेढ़ी चलती है। कभी बनावटी
मुस्कराना। मुड़-मुड़कर आगे-पीछे देखना। चटक-मटककर चलना उन पापात्माओं
का शौक होता है जो अंत में प्रेम विवाह का रूप बन जाता है। बाद में उनको पता
चलता है कि दोनों के अन्य भी प्रेमी-प्रमिकाऐं थी। फिर उनकी दशा भगवान
शिवजी-पार्वती वाली होती है। न घर के रहते हैं, न घाट के। विवाह करने का
उद्देश्य ऊपर बता दिया है। इससे हटकर जो भी कदम युवा उठाते हैं, वह जीवन
सफर को नरक बनाने वाला होता है। यदि किसी का प्रेम सम्बन्ध भी बन जाए तो
इस बात का ध्यान अवश्य रखे कि अपने समाज की मर्यादा (जैसे गोत्रा, गाँव तथा
विवाह क्षेत्रा) भंग न होती हो जिससे कुल व माता-पिता की इज्जत को ठेस पहुँचे।
गलती से ऐसा हो भी जाए और बाद में पता चले तो लड़के-लड़की को चाहिए कि
तुरंत उस प्रेम को तोड़ दें। अंतरजातिय विवाह वर्तमान में करने में कोई हानि नहीं
है, परंतु उपरोक्त मर्यादा का ध्यान अवश्य रखें। भगवान शिव जी ने भी देवी
पार्वती को इसी कारण से त्यागा था।
पति और पत्नी का पूर्ण सुख प्राप्त करने के लिए सच्ची भक्ति करना अति आवश्यक है सच्ची भक्ति करने से पूर्ण रूप से दोनों में विश्वास पैदा होता है और एक दूसरे पर शक करने की दुविधा हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है वह सर्वदा सुखी जीवन यापन करने में सक्षम होता
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। हर रोज दोपहर 2:00 बजे श्रद्धा चैनल
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शिवजी-पार्वती वाली होती है। न घर के रहते हैं, न घाट के। विवाह करने का
उद्देश्य ऊपर बता दिया है। इससे हटकर जो भी कदम युवा उठाते हैं, वह जीवन
सफर को नरक बनाने वाला होता है। यदि किसी का प्रेम सम्बन्ध भी बन जाए तो
इस बात का ध्यान अवश्य रखे कि अपने समाज की मर्यादा (जैसे गोत्रा, गाँव तथा
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गलती से ऐसा हो भी जाए और बाद में पता चले तो लड़के-लड़की को चाहिए कि
तुरंत उस प्रेम को तोड़ दें। अंतरजातिय विवाह वर्तमान में करने में कोई हानि नहीं
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