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पर्यावरण के लाभ

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पर्यावरण में वह सभी प्राकृतिक संसाधन शामिल है जो कई तरीकों से हमारी मदद करते हैं तथा चारों ओर से हमें घेरे हुएं हैं। यह हमें बढ़ने तथा विकसित होने का बेहतर माध्यम देता है, यह हमें वह सब कुछ प्रदान करता है जो इस ग्रह पर जीवन यापन करने हेतु आवश्यक है। हमारा पर्यावरण भी हमसे कुछ मदद की अपेक्षा रखता है जिससे की हमारा लालन पालन हो, हमारा जीवन बने रहे और कभी नष्ट न हो। तकनीकी आपदा के वजह से दिन-प्रतिदिन हम प्राकृतिक तत्व को अस्वीकार रहे हैं।                                     पर्यावरण विश्व पर्यावरण दिवस तथा पर्यावरण सुरक्षा के उपाय पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए हमें पर्यावरण के वास्तविकता को बनाए रखना होगा, पूरे ब्रम्हांड में बस पृथ्वी पर ही जीवन है। वर्षों से प्रत्येक वर्ष 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए तथा साथ ही पर्यावरण स्वच्छता और सुरक्षा के लिए दुनिया भर में मनाया जाता है। पर्यावरण दिवस समारोह के विषय को जानने के लिए, हमारे पर्यावरण को किस ...

भक्त ध्रुव की कथा

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भक्त ध्रुव की उत्पत्ति राजा उतानपात को अपनी पत्नी सुनीति से विवाह के कई वर्षों पश्चात् तक कोई संतान प्राप्त नहीं हुई। एक दिन नारद जी ने रानी सुनीति से बताया कि राजा का दूसरा विवाह होगा तो आपको भी संतान प्राप्त होगी और उस नई पत्नी को भी संतान प्राप्त होगी। राजा का वृद्ध अवस्था में दूसरा विवाह हुआ। छोटी पत्नी ने नगर की सीमा पर आकर राजा से वचनबद्ध होकर अपनी शर्त मानने पर विवश किया कि मैं तेरे घर तब चलूंगी, जब तू मेरी बहन को जो आपकी पत्नी है, जाते ही घर से निकालकर दूसरे मकान में रखेगा। उसको सवा सेर अन्न खाने को प्रतिदिन देगा तथा मेरे गर्भ से उत्पन्न पुत्रा को राज्य देगा। सुनिती ही अपने माता-पिता के पास से जिद करके अपनी छोटी बहन सुरिती को माँगकर लाई थी। सुरिती को दुःख था कि इसने मेरे जीवन से खिलवाड़ किया है कि एक वृद्ध से मेरा विवाह कराया है। राजा ने विवश होकर यह शर्त मान ली। कुछ वर्ष पश्चात् बड़ी रानी सुनिती ने एक लड़के को जन्म दिया। उसका नाम धु्रव रखा !                                   ...

पर्यावरण को नुकसान

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पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है:- चारों ओर का वातावरण जिसमें हम स्वास लेते हैं इसके अंतर्गत वायु धरती ध्वनि जल रहन-सहन आदि से युक्त पूरा प्राकृतिक वातावरण आ जाता है आज भारत ही नहीं सारा संसार पर्यावरण प्रदूषण के नुकसान की समस्या से ग्रसित है                                                वर्तमान में पानी हवा रेत मिट्टी आदि के साथ-साथ मनुष्य की संस्कृति भी पर्यावरण के नुकसान से प्रभावित हो रहे हैं प्रतिवर्ष पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है परंतु पर्यावरण के प्रदूषण के नुकसान कम नहीं हो रहे हैं पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने एक अन्य कारण जनसंख्या की असीमित वृद्धि भी है औद्योगिकरण शहरीकरण आदि के लिए खेतों व वनों को नष्ट किया जा रहा है इससे भी पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है वनों की कटाई से जीवो के स्वास्थ्य पर बुरा असर हो रहा है अनुवांशिक दुष्प्रभाव  पड़ रहा है तथा  बाड व भू संकलन ज्यादा हो रही है धरती के तापमान की वृद्धि तथा असमय रितु परिवर्तन से प्राकृतिक व...

गलत भक्ति करने से नास्तिकता

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नास्तिकता क्या है:- शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने से मैं ना तो ज्ञान मिलता है और ना ही मोक्ष प्राप्त होता है अतः गलत भक्ति करने से जीवन दुखी में हो जाता है अपने मन के अनुसार भक्ति करते रहने से ब्राह्मणों के चक्कर में आकर तीर्थ स्थानों पर जाने लग जाते हैं और यह सोचने लगते हैं कि हम ही सही भक्ति कर रहे हैं अगर कोई सही भक्ति बताने वाला मिल जाए तो हम उसकी बात नहीं मानते और उसे कहते हैं तुम तो नास्तिक हो भगवान को तुम क्या जानो, और धीरे-धीरे हम सही बात को भी गलत बताने लग जाते हैं इसे शास्त्र विरुद्ध साधना कहते हैं और वह धीरे-धीरे नास्तिकता की ओर अग्रसर होने लगता है  शास्त्र अनुसार भक्ति करने से और तत्वदर्शी संत को गुरु बनाने से और उसके बताए हुए मार्ग पर चलने से ही सत भक्ति और पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है पूर्ण गुरु के बताए अनुसार भक्ति करते रहने से और नियमों का पालन करने से यह मनुष्य जन्म सफल होता है परमात्मा कहते हैं:- मानुष जन्म दुर्बल है यह मिले ना बारंबार                               तरुवर से पत्...

माँस खाना बाईबल में निषेध

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इसी उत्पत्ति ग्रन्थ में बाईबल में लिखा है कि (श्लोक 27-28 में) मनुष्यों के खाने के लिए बीजदार पौधे (गेहूँ, चने, बाजरा आदि-आदि) तथा फलदार वृक्ष दिए हैं, यह तुम्हारा भोजन है। पशु-पक्षियों के खाने के लिए घास, पत्तेदार झाडि़याँ दी हैं। इसके पश्चात् परमात्मा तो अपने निजधाम (सत्यलोक) में तख्त पर जा बैठा। बाईबल में आगे जो ज्ञान है वह काल भगवान का तथा इसके पुत्रों का दिया हुआ है। यदि बाईबल, ग्रन्थ में आगे चलकर माँस खाने के लिए लिखा है तो वह पूर्ण परमात्मा का आदेश नहीं है। वह किसी अधूरे प्रभु का है। पूर्ण परमात्मा (ब्वउचसमजम ळवक) के आदेश की अवहेलना हो जाने से पाप का भागी बनता है आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर जाएं 👇 http://www.jagatgururampalji.org आध्यात्मिक ज्ञान की पुस्तक ✓जीने की...

प्रेम प्रसंग कैसा होता है?

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विवाह करने का उद्देश्य :- विवाह का उद्देश्य केवल संतानोत्पत्ति करना है। फिर पति-पत्नी मिलकर परिश्रम करके बच्चों का पालन करते हैं। उनका विवाह कर देते हैं। फिर वे अपना घर बसाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रेम विवाह समाज में अशांति का बीज बोना है। समाज बिगाड़ की चिंगारी है                                  प्रेम प्रसंग कैसा होता है? जो चरित्राहीन लड़के-लड़की होते हैं, वे चलते समय अजीबो-गरीब ऐक्टिंग करते हैं। उन लजमारों की दृष्टि भी टेढ़ी-मेढ़ी चलती है। कभी बनावटी मुस्कराना। मुड़-मुड़कर आगे-पीछे देखना। चटक-मटककर चलना उन पापात्माओं का शौक होता है जो अंत में प्रेम विवाह का रूप बन जाता है। बाद में उनको पता चलता है कि दोनों के अन्य भी प्रेमी-प्रमिकाऐं थी। फिर उनकी दशा भगवान शिवजी-पार्वती वाली होती है। न घर के रहते हैं, न घाट के। विवाह करने का उद्देश्य ऊपर बता दिया है। इससे हटकर जो भी कदम युवा उठाते हैं, वह जीवन सफर को नरक बनाने वाला होता है। यदि किसी का प्रेम सम्बन्ध भी बन जाए तो इस बात का ध्यान अवश्य र...

कोरोना वायरस क्या है

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कोरोना वायरस एक जानलेवा बीमारी है इसका उपचार अभी किसी देश के पास नहीं है इसलिए सावधानी ही बचाव है मास्क लगाना सैनिटाइजर करना जैसे सरकार ने बताया उसकी गाइडलाइन पर चलना ही बचाव है जो हमारे देश की पुलिस डॉक्टर्स नर्सेज सफाई कर्मचारी इन योद्धाओं का सहयोग करें कोरोनावायरस से लड़ने में