गलत भक्ति करने से नास्तिकता
नास्तिकता क्या है:-
शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने से मैं ना तो ज्ञान मिलता है और ना ही मोक्ष प्राप्त होता है अतः गलत भक्ति करने से जीवन दुखी में हो जाता है अपने मन के अनुसार भक्ति करते रहने से ब्राह्मणों के चक्कर में आकर तीर्थ स्थानों पर जाने लग जाते हैं और यह सोचने लगते हैं कि हम ही सही भक्ति कर रहे हैं अगर कोई सही भक्ति बताने वाला मिल जाए तो हम उसकी बात नहीं मानते और उसे कहते हैं तुम तो नास्तिक हो भगवान को तुम क्या जानो, और धीरे-धीरे हम सही बात को भी गलत बताने लग जाते हैं इसे शास्त्र विरुद्ध साधना कहते हैं और वह धीरे-धीरे नास्तिकता की ओर अग्रसर होने लगता है
शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने से मैं ना तो ज्ञान मिलता है और ना ही मोक्ष प्राप्त होता है अतः गलत भक्ति करने से जीवन दुखी में हो जाता है अपने मन के अनुसार भक्ति करते रहने से ब्राह्मणों के चक्कर में आकर तीर्थ स्थानों पर जाने लग जाते हैं और यह सोचने लगते हैं कि हम ही सही भक्ति कर रहे हैं अगर कोई सही भक्ति बताने वाला मिल जाए तो हम उसकी बात नहीं मानते और उसे कहते हैं तुम तो नास्तिक हो भगवान को तुम क्या जानो, और धीरे-धीरे हम सही बात को भी गलत बताने लग जाते हैं इसे शास्त्र विरुद्ध साधना कहते हैं और वह धीरे-धीरे नास्तिकता की ओर अग्रसर होने लगता है
शास्त्र अनुसार भक्ति करने से और तत्वदर्शी संत को गुरु बनाने से और उसके बताए हुए मार्ग पर चलने से ही सत भक्ति और पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है पूर्ण गुरु के बताए अनुसार भक्ति करते रहने से और नियमों का पालन करने से यह मनुष्य जन्म सफल होता है
परमात्मा कहते हैं:- मानुष जन्म दुर्बल है यह मिले ना बारंबार
तरुवर से पत्ता टूट गिरे बहुर लगता ना डार
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